Sonipat Ankit: विदेश जाकर परिवार की गरीबी दूर करने और एक बेहतर भविष्य गढ़ने का सपना जब ताबूत में बंद होकर लौटता है, तो उसकी चीख पूरे इलाके को सुन्न कर देती है। सोनीपत के गाँव इब्राहिमपुर कुराड़ के 30 वर्षीय युवक अंकित की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जो बेटा घर की तंगहाली मिटाने के लिए सात समंदर पार गया था, वह आज गुरुवार को निर्जीव देह बनकर अपने गाँव वापस लौट रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका ने हरियाणा के एक और लाल को निगल लिया है।
Sonipat Ankit: कर्ज लेकर भेजा था विदेश, आंखों में थे सुनहरे सपने
अंकित का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। घर में महज आधा एकड़ जमीन है और आय का कोई ठोस साधन नहीं है। पिता, जो कभी ड्राइविंग कर घर चलाते थे, पिछले 6 साल से गंभीर बीमारियों के कारण बिस्तर पर हैं। शुगर की अधिकता की वजह से उनका एक पैर घुटने तक काटना पड़ा था। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी इकलौते बेटे अंकित के कंधों पर थी।
परिवार ने अपनी जमा-पूंजी और भारी कर्ज उठाकर लगभग 5 लाख रुपये जुटाए थे, ताकि अंकित विदेश जाकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अच्छी नौकरी पाकर घर की स्थिति सुधार सके। अंकित ने सोनीपत से बीए की पढ़ाई पूरी की थी और आगे के भविष्य के लिए उसने 13 मार्च 2025 को एक मेडिएटर के जरिए स्टडी वीजा पर रूस का रुख किया था।
Sonipat Ankit: होटल की नौकरी से युद्ध के मोर्चे तक का सफर
रूस पहुँचने के बाद शुरुआती 5-6 महीनों तक सब कुछ ठीक रहा। अंकित मॉस्को के एक होटल में काम कर रहा था और साथ ही अपना लैंग्वेज कोर्स (भाषा का अध्ययन) भी जारी रखे हुए था। वह नियमित रूप से घर पैसे भेजता और बीमार पिता की सेहत का हाल पूछता था। लेकिन धीरे-धीरे स्थितियाँ बदलने लगीं।
अंकित के मामा संजय के अनुसार, रूस में भारतीय युवाओं को फंसाने का एक सोची-समझी साजिश चल रही है। वहां एजेंटों के माध्यम से युवाओं को पहले 2 लाख रुपये मासिक वेतन का लालच दिया जाता है। जो युवक इस लालच में नहीं आते, उन पर मानसिक और प्रशासनिक दबाव बनाया जाता है ताकि वे रूसी सेना में शामिल हो जाएं। अंकित भी इसी चक्रव्यूह का शिकार हो गया और एक भारतीय एजेंट के माध्यम से उसे सेना में भर्ती कर लिया गया।
Sonipat Ankit: मात्र 15 दिन की ट्रेनिंग और मौत के मुहाने पर तैनाती
अंकित को 26 अगस्त 2025 को रूस के एवानावा शहर में सेना में शामिल किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी सैन्य पृष्ठभूमि वाले इस युवक को युद्ध जैसे भीषण हालात के लिए महज 15 दिन की सामान्य ट्रेनिंग दी गई। इतनी कम ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे रूस-यूक्रेन की फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि फ्रंटलाइन तक पहुँचने के लिए एक नदी पार करनी पड़ती थी, जहाँ भीषण गोलाबारी और संघर्ष जारी था। इसी मोर्चे पर लड़ाई के दौरान अंकित वीरगति को प्राप्त हो गया।

Sonipat Ankit: 12 अक्टूबर से टूटा था संपर्क, दूतावास ने दी सूचना
अंकित की अपने परिवार से आखिरी बातचीत 12 अक्टूबर 2025 को हुई थी। उसके बाद से उसका फोन बंद आने लगा। परिवार को लगा कि शायद युद्ध क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या होगी या अंकित किसी सुरक्षित स्थान पर होगा। उन्हें क्या पता था कि उनकी आखिरी बात वाकई “आखिरी” थी।
मंगलवार को जब अंकित के मामा संजय और उसके दोस्त जितेंद्र को भारतीय दूतावास से फोन आया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दूतावास ने आधिकारिक तौर पर अंकित की मौत की पुष्टि की। इस खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। अंकित की दो बहनें हैं जो शादीशुदा हैं, और घर पर बूढ़े माता-पिता अपने बेटे के एक साल बाद लौटने का इंतजार कर रहे थे ताकि उसकी शादी की जा सके।
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Sonipat Ankit: गाँव में मातम और उठते गंभीर सवाल
आज जब अंकित का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गाँव कुराड़ इब्राहिमपुर पहुँचेगा, तो पूरा जिला उसकी अंतिम विदाई का साक्षी बनेगा। इस घटना ने उन एजेंटों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जो मासूम युवाओं को स्टडी वीजा के नाम पर विदेश भेजते हैं और फिर उन्हें युद्ध की आग में झोंक देते हैं।
Sonipat Ankit परिवार की मांगें:
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इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच की जाए और दोषी एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
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रूस में फंसे अन्य भारतीय युवाओं को तुरंत रेस्क्यू कर सुरक्षित वापस लाया जाए।
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गरीब और बेसहारा हो चुके परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
अंकित तो चला गया, लेकिन उसकी मौत ने उन हजारों परिवारों को डरा दिया है जिनके बच्चे सुनहरे भविष्य की तलाश में विदेश गए हैं। एक इकलौते बेटे का जाना सिर्फ एक जान का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे कुल के भविष्य का अंत है। Sonipat Ankit
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