Inspirational Haryana Conductor: हरियाणा रोडवेज के बेड़े में हजारों बसें दौड़ती हैं और लाखों यात्री रोज सफर करते हैं, लेकिन रोहतक की एक बस ऐसी है जहाँ चढ़ते ही यात्रियों को टिकट के साथ-साथ ‘ममता की ठंडक’ और ‘अपनत्व’ का अहसास होता है।
यह सब मुमकिन हुआ है हरियाणा रोडवेज के एक ऐसे जांबाज सिपाही की वजह से, जिन्होंने सरकारी नौकरी को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग बना लिया है। पेश है रोहतक के गांव भाली आनंदपुर निवासी कंडक्टर सुरेंदर शर्मा की मानवता और सेवा भाव की एक विस्तृत रिपोर्ट:
Inspirational Haryana Conductor: ड्यूटी से परे मानवता का सफर
आमतौर पर किसी भी सरकारी बस में सफर करते समय यात्री और कंडक्टर का रिश्ता केवल ‘टिकट और पैसे’ के लेनदेन तक सीमित रहता है। लेकिन यदि आप रोहतक से दिल्ली या रोहतक से गुरुग्राम वाले रूट पर सफर कर रहे हैं, तो आपकी मुलाकात सुरेंदर शर्मा से हो सकती है। सुरेंदर न केवल अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं, बल्कि वह हर यात्री का स्वागत एक गिलास ठंडे पानी के साथ करते हैं।
जैसे ही बस में कोई यात्री सवार होता है, सुरेंदर शर्मा मुस्कुराते हुए उन्हें टिकट थमाते हैं और साथ ही पानी के लिए पूछते हैं। कई बार जब बस में भीड़ अधिक होती है या कोई बुजुर्ग यात्री प्यासा नजर आता है, तो सुरेंदर खुद उनकी सीट तक जाकर उन्हें पानी पिलाते हैं।

Inspirational Haryana Conductor पिछले 12 वर्षों से जारी है अटूट सेवा का संकल्प
यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं है। सुरेंदर शर्मा पिछले 12 वर्षों से निरंतर इस सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। चिलचिलाती गर्मी हो या उमस भरा मौसम, यात्रियों को सफर के दौरान प्यास से राहत दिलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
खर्च अपना, सेवा सबकी:
हैरानी की बात यह है कि इस सेवा के लिए वे विभाग से कोई सहायता नहीं लेते। वे हर दिन बस के प्रस्थान से पहले अपने निजी खर्च पर 3 से 4 ठंडे पानी के बड़े कैंपर बस में रखवाते हैं। रोहतक की तपती सड़कों पर जब बस दौड़ती है, तो यात्रियों के लिए यह पानी किसी अमृत से कम नहीं होता।

Inspirational Haryana Conductor: मां के संस्कारों की विरासत
हर नेक कार्य के पीछे एक प्रेरणा होती है, और सुरेंदर के लिए वह प्रेरणा उनकी माता जी हैं। सुरेंदर बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही अपनी मां को निस्वार्थ भाव से समाज और मूक जीवों की सेवा करते देखा है। उनके घर में सेवा का जो वातावरण था, उसी ने सुरेंदर के भीतर परोपकार के बीज बोए।
सुरेंदर का कहना है:
“मैंने अपनी मां से सीखा है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ड्यूटी तो हर कोई करता है, लेकिन दूसरों की प्यास बुझाने से जो आत्मिक संतुष्टि और शांति मिलती है, वह किसी भी वेतन या पद से कहीं ऊपर है।”
Inspirational Haryana Conductor यात्रियों का अनुभव: दुआओं का सफर
आज के समय में जहाँ सरकारी तंत्र में लोग अक्सर केवल औपचारिकता निभाते हैं, वहीं सुरेंदर शर्मा की यह पहल यात्रियों के दिलों को छू लेती है। बस में सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि उन्होंने आज तक ऐसा कंडक्टर नहीं देखा जो अपनी जेब से पैसे खर्च कर यात्रियों को पानी पिलाता हो।
यात्रियों के चेहरे पर आने वाली मुस्कान और उनके मुख से निकलने वाला ‘आशीर्वाद’ ही सुरेंदर की असली कमाई है। विशेषकर बुजुर्ग और बच्चों के लिए सुरेंदर एक रक्षक की तरह नजर आते हैं।
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Inspirational Haryana Conductor समाज के लिए एक बड़ा संदेश
वर्तमान में सुरेंदर शर्मा मुख्य रूप से रोहतक-दिल्ली और रोहतक-गुरुग्राम रूट पर कार्यरत हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए बड़े पद की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक बड़े और नेक दिल की जरूरत होती है।
एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते, उन्होंने यह मिसाल पेश की है कि हम अपने निर्धारित कार्य के साथ-साथ समाज को सकारात्मकता भी दे सकते हैं। सुरेंदर शर्मा की यह छोटी सी पहल आज पूरे हरियाणा में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग उनके इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

Inspirational Haryana Conductor मुख्य विशेषताएं जो सुरेंदर को बनाती हैं खास:
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निस्वार्थ सेवा: 12 साल से निरंतर बिना किसी स्वार्थ के पानी पिलाना।
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स्वयं का खर्च: पानी के कैंपर का पूरा खर्च स्वयं वहन करना।
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परोपकारी स्वभाव: ड्यूटी के दौरान यात्रियों को परिवार जैसा सम्मान देना।
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मातृ प्रेरणा: अपनी मां के सेवा भाव को आगे बढ़ाना।
सुरेंदर शर्मा जैसे लोग यह विश्वास दिलाते हैं कि दुनिया में आज भी इंसानियत जिंदा है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सेवा करने के लिए संसाधनों की नहीं, बल्कि सेवा की नीयत की आवश्यकता होती है।
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