Punjab Baba: पंजाब की सियासत में 'खेड़ी वाले बाबा' का धमाका
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Punjab Baba: पंजाब की सियासत में ‘खेड़ी वाले बाबा’ का धमाका, धर्म से राजनीति का सफर

Punjab Baba: पंजाब की राजनीति हमेशा से अपने अनूठे किरदारों और अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती रही है। लेकिन इस बार संगरूर के रहने वाले बाबा गुरविंदर सिंह खेड़ी वाले ने अपनी पॉलिटिकल एंट्री से पूरे प्रदेश में नई बहस छेड़ दी है।

सार्वजनिक मंचों से अफीम खाने की बात स्वीकार करने वाले और अपनी निजी जिंदगी के विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाले बाबा खेड़ी वाले ने अब ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ का दामन थाम लिया है। यह वही पार्टी है जिसका नेतृत्व खड़ूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह कर रहे हैं।

Punjab Baba विरोधाभासों का मिलन: नशा विरोध बनाम अफीम समर्थन

बाबा की इस राजनीतिक पारी ने सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ ला दी है। सबसे बड़ा सवाल नैतिकता और सिद्धांतों का है:

  • पार्टी का स्टैंड: अमृतपाल सिंह और उनकी पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ का मुख्य एजेंडा पंजाब से सिंथेटिक नशे (चिट्टा आदि) को खत्म करना रहा है।

  • बाबा का स्टैंड: इसके विपरीत, बाबा गुरविंदर सिंह खुलेआम अफीम के सेवन का समर्थन करते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था, “मैं अफीम खाता हूं और यह बात मैंने अपनी पत्नी को भी बताई थी।”

अब जनता पूछ रही है कि जो पार्टी नशे के खिलाफ जंग लड़ने का दावा करती है, वह अफीम का समर्थन करने वाले चेहरे को अपना ‘स्टार प्रचारक’ कैसे बना सकती है?

Punjab Baba: पंजाब की सियासत में 'खेड़ी वाले बाबा' का धमाका
Punjab Baba: बाबा गुरविंदर सिंह कुछ समय पहले लव मैरिज कर चर्चा में आए थे। – फाइल फोटो

Punjab Baba जॉइनिंग के वक्त बाबा के बड़े बोल: “अमृतपाल ही अगले मुख्यमंत्री”

चंडीगढ़ में पार्टी की सदस्यता लेते हुए बाबा खेड़ी वाले ने न केवल अमृतपाल सिंह की तारीफ की, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बड़ी भविष्यवाणी भी कर दी। उनके संबोधन के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

आत्मा की आवाज: बाबा ने कहा कि उन्होंने बहुत आत्मचिंतन किया कि पंजाब के युवाओं के भविष्य का असली हकदार कौन है। उनकी आत्मा ने जवाब दिया कि केवल अमृतपाल सिंह ही वोटों के हकदार हैं।

मुख्यमंत्री पद की भविष्यवाणी: बाबा ने जोश में आकर कहा, “मैं स्टांप पेपर पर लिखकर देने को तैयार हूं कि पंजाब के अगले मुख्यमंत्री अमृतपाल सिंह ही बनेंगे।”

सिख मर्यादा का आश्वासन: दाढ़ी और पगड़ी के सम्मान पर बोलते हुए बाबा ने कहा कि अगर कौम की बागडोर इस पार्टी के हाथ में रहती है, तो वे किसी की दाढ़ी पर दाग नहीं लगने देंगे, बल्कि उसे बादाम के तेल से सहेजेंगे।

तेज रफ्तार राजनीति: उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि आम नेता 80-100 की स्पीड पर चलते हैं, लेकिन उनके ‘भाई साहब’ (अमृतपाल) की गाड़ी 500 की स्पीड से दौड़ रही है, इसलिए सबको उनके साथ खड़ा होना चाहिए।

Punjab Baba: पंजाब की सियासत में 'खेड़ी वाले बाबा' का धमाका
Punjab Baba: अकाली दल वारिस पंजाब दे जॉइन करने के बाद आगे नीली पगड़ी में मूंछों पर ताव देते हुए बाबा गुरविंदर सिंह खेड़ी वाले।

Punjab Baba सांसद सरबजीत सिंह खालसा का बचाव

इस जॉइनिंग पर जब विवाद बढ़ा, तो ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख नेता और सांसद सरबजीत सिंह खालसा बचाव में उतरे। उन्होंने एक तर्क देते हुए कहा कि बाबा जिस अफीम की बात करते हैं, वह एक ‘नेचुरल नशा’ है जिसका उपयोग दवाओं में भी होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफीम उस घातक सिंथेटिक नशे से बेहतर है जिसने पंजाब की जवानी बर्बाद कर दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे व्यक्तिगत रूप से किसी भी तरह के नशे का समर्थन नहीं करते।

Punjab Baba विवादों का पुराना नाता: जेल से लेकर जानलेवा हमले तक

बाबा गुरविंदर सिंह खेड़ी वाले का जीवन फिल्मी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनकी राजनीतिक एंट्री को समझने के लिए उनके पुराने विवादों को जानना जरूरी है:

  • ससुराल पक्ष से खूनी जंग: बाबा की पहली शादी अरेंज मैरिज थी, लेकिन जल्द ही उनके संबंध अपनी सास और साले से खराब हो गए। बाबा का आरोप है कि उनके ससुराल वाले उनकी करोड़ों की संपत्ति हड़पना चाहते थे।

  • धारा 307 और टूटा हुआ जबड़ा: बाबा ने दावा किया कि उनके साले ने उन पर गाड़ी चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश की थी, जिसमें उनका जबड़ा बुरी तरह टूट गया और वे लंबे समय तक लुधियाना के DMC अस्पताल में भर्ती रहे। आज भी उनका साला फरार बताया जाता है।

  • जेल यात्रा: दूसरी ओर, ससुराल पक्ष ने उन पर पत्नी को बंधक बनाने और हवाई फायरिंग कर डराने का केस दर्ज कराया था, जिसकी वजह से बाबा को जेल की हवा भी खानी पड़ी।

  • घोड़ों को जहर देने का दर्द: बाबा के लिए सबसे भावुक क्षण वह था जब उनके जेल में रहने के दौरान उनके फार्म हाउस पर उनकी 3 कीमती घोड़ियां मर गईं। बाबा का आरोप है कि उनके विरोधियों ने घोड़ों को जहर देकर मार दिया। बता दें कि बाबा अपने घोड़ों को ‘पंजाब शृंगार’ जैसे नाम देने के लिए जाने जाते हैं।

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Punjab Baba 2027 की चुनावी बिसात

बाबा खेड़ी वाले ने एलान किया है कि वे 2027 के चुनाव में अमृतपाल सिंह की पार्टी के हर उम्मीदवार के लिए गांव-गांव जाकर प्रचार करेंगे। पंजाब की राजनीति में धार्मिक डेरों और प्रभावशाली बाबाओं का हमेशा से दखल रहा है, लेकिन अफीम के खुले समर्थन और खालिस्तानी विचारधारा के साथ इस गठजोड़ ने पंजाब की सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक विश्लेषकों को चौकन्ना कर दिया है।

Punjab Baba निष्कर्ष

क्या बाबा खेड़ी वाले का ‘नेचुरल नशा’ वाला तर्क पंजाब की जनता को स्वीकार होगा? या फिर उनकी यह पॉलिटिकल एंट्री अमृतपाल सिंह की पार्टी के ‘नशा मुक्त पंजाब’ वाले नारे को कमजोर कर देगी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब 2027 के चुनावी नतीजे ही देंगे। फिलहाल, बाबा की एंट्री ने पंजाब की सियासी फिजां में एक नया ‘नशा’ घोल दिया है।

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