Randeep hooda: यह एक बहुत ही दिलचस्प और गर्व करने वाली खबर है! बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार रणदीप हुड्डा की माता जी, आशा हुड्डा का सिल्वर स्क्रीन पर डेब्यू करना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि हरियाणा की संस्कृति के लिए भी एक खास पल है।
बॉलीवुड के ‘सार्जेंट’ यानी रणदीप हुड्डा अक्सर अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीतते हैं, लेकिन इस बार सुर्खियां उनकी माता जी, आशा हुड्डा बटोर रही हैं। राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय रहने के बाद अब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा है। खास बात यह है कि अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने सीधे ‘दादी’ का किरदार निभाया है।

Randeep hooda का मजाकिया अंदाज: “सीधा दादी का रोल!”
जैसे ही आशा हुड्डा के फिल्मी डेब्यू की खबर आई, उनके बेटे रणदीप हुड्डा अपनी खुशी और हंसी नहीं रोक पाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर बेहद मजाकिया और ठेठ हरियाणवी लहजे में अपनी मां को बधाई दी। रणदीप ने लिखा— “जिब मां के रोल का टेम था, टेम ना मिल्या, तै ईब सीधा दादी का।” (जब मां के रोल का समय था, तब समय नहीं मिला, तो अब सीधा दादी का रोल मिला है)।
रणदीप ने बताया कि जब शूटिंग के बाद मां ने उन्हें इस बारे में बताया, तो वह काफी देर तक हंसते रहे। हालांकि, उन्होंने पूरी टीम और अपनी मां को इस नई शुरुआत के लिए ढेरों शुभकामनाएं भी दीं।

Randeep hooda ‘सांगी’ फिल्म: हरियाणा की संस्कृति का संगम
आशा हुड्डा ने ‘सांगी’ नामक फिल्म से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की है। इस फिल्म की क्रिएटर गीतू परी (सोनीपत निवासी) हैं। फिल्म की कहानी के बारे में बात करते हुए गीतू ने बताया कि यह एक कलाकार के संघर्ष की गाथा है, जिसमें मुख्य भूमिका साक्षी दलाल ने निभाई है। फिल्म में लव ट्राइएंगल का तड़का भी है।
किरदार और शूटिंग से जुड़ी खास बातें:
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डेढ़ साल पहले मिला ऑफर: आशा हुड्डा को इस रोल के लिए करीब डेढ़ साल पहले कॉल आया था। गीतू परी ने उन्हें फिल्म की पटकथा और उनके किरदार के महत्व के बारे में समझाया, जिसके बाद उन्होंने इसके लिए हामी भरी।
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जींद की लोकेशन: फिल्म में उनके हिस्से की शूटिंग जींद और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में हुई है। आशा हुड्डा के अनुसार, शूटिंग का अनुभव बहुत सहज रहा और महज 1-2 दिनों में ही उनके सीन पूरे हो गए।
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उद्देश्य: आशा हुड्डा ने यह रोल इसलिए साइन किया क्योंकि वह सिनेमा के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध संस्कृति और लोक कलाओं को दुनिया के सामने लाना चाहती थीं।

Randeep hooda कॉलेज के दिनों से था एक्टिंग का शौक
भले ही फिल्मों में एंट्री अब हुई हो, लेकिन अभिनय का बीज आशा हुड्डा के मन में कॉलेज के दिनों से ही था। उन्होंने 1971 में रोहतक के वूमेन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उस दौरान वह कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। हालांकि, शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों और फिर राजनीति में व्यस्त होने के कारण यह शौक पीछे छूट गया था। वह बताती हैं कि वह मजाक में अक्सर रणदीप से कहती थीं, “कभी मां का रोल मिले तो मुझे भी कास्ट करना।”
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Randeep hooda आशा हुड्डा का राजनीतिक और सामाजिक सफर
अभिनय की दुनिया में आने से पहले आशा हुड्डा एक कद्दावर राजनेता और समाजसेविका के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
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बीजेपी में शुरुआत: 1994 में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।
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संगठन में पद: साल 2000 से 2003 तक वह हरियाणा बीजेपी महिला मोर्चा की जनरल सेक्रेटरी रहीं। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी शिक्षक प्रकोष्ठ की पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
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सरकारी जिम्मेदारी: 2018 में हरियाणा सरकार ने उन्हें ‘हरियाणा पावर जनरेशन’ का डायरेक्टर नियुक्त किया था।
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चुनाव की दावेदारी: उन्होंने 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में पृथला सीट से टिकट की दावेदारी पेश की थी। गौरतलब है कि पृथला विधानसभा क्षेत्र में ही उनके मामा का गांव भी आता है।
Randeep hooda भविष्य की योजनाएं
अपनी पहली फिल्म के अनुभव को ‘बेहतरीन’ बताते हुए आशा हुड्डा ने कहा कि उन्हें शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में उन्हें और भी अच्छे और सार्थक किरदार मिलते हैं, तो वह पर्दे पर अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरना जारी रखेंगी।
रणदीप हुड्डा के फैंस अब पर्दे पर ‘मां’ और ‘बेटे’ की इस जोड़ी को एक साथ देखने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, पूरा हुड्डा परिवार और उनके शुभचिंतक आशा हुड्डा के इस ‘दादी’ वाले अवतार की सराहना कर रहे हैं।
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