Raghav Chadha vs AAP: पार्टी में बड़ी दरार
पंजाब न्यूज

Raghav Chadha vs AAP: पार्टी में बड़ी दरार! राघव चड्ढा बोले- ‘मुझे खामोश किया, पर मैं हारा नहीं’

Raghav Chadha vs AAP : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची आंतरिक रार अब खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ गई है। पार्टी के सबसे युवा और मुखर चेहरों में से एक, राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘उपनेता’ (Deputy Leader) के पद से हटा दिया गया है।

इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें खामोश करने की कोशिश की जा रही है।

Raghav Chadha vs AAP: पार्टी में बड़ी दरार
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Raghav Chadha vs AAP राघव चड्ढा की पहली प्रतिक्रिया: “मैं वो दरिया हूं जो सैलाब बनेगा”

राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के शुक्रवार को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और कड़ा वीडियो संदेश साझा किया। संसद परिसर में खड़े होकर रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में उन्होंने कहा:

“मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं। यह आम आदमी के लिए मेरा संदेश है। मैं संसद में जनता के वो मुद्दे उठाता हूं जिन्हें आमतौर पर कोई नहीं उठाता। क्या पब्लिक इश्यूज पर बात करना अपराध है? क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया?”

राघव ने आगे खुलासा किया कि पार्टी ने न केवल उन्हें पद से हटाया है, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी सुनिश्चित किया है कि उन्हें सदन में बोलने का समय न दिया जाए। वीडियो के अंत में उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”

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Raghav Chadha vs AAP: राघव चड्‌डा द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट

Raghav Chadha vs AAP: तीखा पलटवार: “समोसे सस्ते करवाने की बात करते थे चड्ढा”

राघव के बयान के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। ढांडा ने कहा कि राघव अब अरविंद केजरीवाल के ‘निडर सिपाही’ नहीं रहे और वे प्रधानमंत्री मोदी से डर गए हैं।

पार्टी के मुख्य आरोप:

  • समोसे बनाम देश: ढांडा ने कहा, “संसद में पार्टी को बहुत कम समय मिलता है। उस समय का उपयोग देश बचाने के संघर्ष के लिए होना चाहिए या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने के लिए?”

  • प्रस्ताव पर साइन से इनकार: आरोप है कि पार्टी जब राज्यसभा में CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) के खिलाफ प्रस्ताव लाई, तो राघव चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

  • मोदी की ‘हाजिरी’: पार्टी प्रवक्ता ने दावा किया कि जब पूरी पार्टी सदन से वॉकआउट करती है, तो राघव मोदी जी की हाजिरी लगाने के लिए सदन में बैठे रहते हैं।

  • केजरीवाल से दूरी: राघव उस वक्त भी गायब थे जब पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल जेल में थे। वे यूके (UK) में थे और केजरीवाल के बरी होने पर भी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया।

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Raghav Chadha vs AAP: संसद में बोलते हुए राघव

Raghav Chadha vs AAP अशोक मित्तल बने नए उपनेता: क्या बदलेगी कार्यशैली?

AAP ने राघव चड्ढा की जगह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर और पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया है। पद संभालने के बाद मित्तल ने साफ किया कि उनकी कार्यशैली राघव से अलग होगी। उन्होंने कहा, “हर नेता का अपना व्यक्तित्व होता है। मैं अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव से काम करूंगा, किसी की शैली को नहीं दोहराऊंगा।”

वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बदलाव को ‘रूटीन पॉलिसी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में नेताओं और पदों का बदलाव एक निरंतर प्रक्रिया है।

Raghav Chadha vs AAP क्या राघव चड्ढा ने वाकई ‘आम आदमी’ के मुद्दे उठाए?

भले ही पार्टी उनके मुद्दों को ‘हल्का’ बता रही हो, लेकिन पिछले दो सत्रों में राघव चड्ढा का ट्रैक रिकॉर्ड काफी सक्रिय रहा है। उनके द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:

सत्र उठाए गए प्रमुख मुद्दे
शीतकालीन सत्र 2025 गिग वर्कर्स (Zomato/Swiggy) की सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कॉपीराइट एक्ट में बदलाव, और ‘One Nation, One Health Treatment’।
बजट सत्र 2026 एयरपोर्ट पर किफायती कैफे, 28-दिन के बजाय 30-दिन का मोबाइल रिचार्ज, बैंक मिनिमम बैलेंस पेनल्टी खत्म करना, और संयुक्त इनकम टैक्स फाइलिंग।

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Raghav Chadha vs AAP भविष्य की राजनीति: क्या AAP छोड़ेंगे राघव?

राघव चड्ढा 2022 से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है। वर्तमान में उन्होंने न तो पार्टी छोड़ने की बात कही है और न ही किसी नई रणनीति का खुलासा किया है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक रुख और राघव के ‘सैलाब’ वाले बयान से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में पंजाब और दिल्ली की राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है।

क्या यह एक सांसद की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की लड़ाई है या पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल ‘आम आदमी पार्टी’ के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

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