
Child Online Safety ‘शेयरेंटिंग’ क्या है और यह क्यों चिंता का विषय है?
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98% अभिभावक अपने बच्चों की ऐसी तस्वीरें इंटरनेट पर पोस्ट करते हैं, जो भविष्य में बड़े होने पर बच्चों के लिए शर्मिंदगी या असहजता का कारण बन सकती हैं।
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40% से अधिक माता-पिता रोजाना कम से कम एक बार अपने बच्चे की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हैं।
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79% अभिभावक ‘पब्लिक’ अकाउंट्स पर तस्वीरें शेयर करते हैं, जहां प्राइवेसी सुरक्षा लगभग शून्य होती है और कोई भी अनजान व्यक्ति उन तस्वीरों तक पहुंच सकता है।
Child Online Safety ऑनलाइन तस्वीरें पोस्ट करने के 6 सबसे बड़े साइबर जोखिम
1. AI और डीपफेक (Deepfake) का बढ़ता खतरा
2. जियोटैग (Geotag) और लोकेशन ट्रैकिंग
3. डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) का स्थायी होना
4. पहचान की चोरी (Identity Theft)
5. साइबर बुलिंग (Cyberbullying)
6. अपराधियों और अपहरणकर्ताओं की नजर

Child Online Safety क्या स्कूलों का पोस्ट करना भी खतरनाक है?
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जोखिम: चूंकि स्कूलों के सोशल मीडिया पेजेस ‘पब्लिक’ होते हैं, इसलिए कोई भी असमाजिक तत्व वहां से बच्चों की तस्वीरें, यूनिफॉर्म का बैज, स्कूल की टाइमिंग और लोकेशन निकाल सकता है।
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स्कूलों के लिए सावधानियां:
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स्कूलों को अभिभावकों की लिखित सहमति (Consent Form) के बिना बच्चों की तस्वीरें पोस्ट नहीं करनी चाहिए।
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पोस्ट में कभी भी बच्चे का पूरा नाम या रोल नंबर उजागर न करें।
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सामूहिक तस्वीरों में चेहरे को धुंधला (Blur) करने की नीति अपनाएं।
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एक स्पष्ट और सख्त सोशल मीडिया प्राइवेसी पॉलिसी लागू करें।
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Child Online Safety पुलिस की एडवाइजरी और कानूनी सुरक्षा नियम
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पुलिस एवं I4C एडवाइजरी: ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) और असम पुलिस सहित कई राज्य पुलिस बलों ने अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को बच्चों की संवेदनशील जानकारी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर न शेयर करने की स्पष्ट चेतावनी जारी की है।
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डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act, 2023): भारत सरकार के नए डेटा प्राइवेसी कानून के तहत बच्चों के डिजिटल डेटा को विशेष सुरक्षा दी गई है:
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किसी भी बच्चे (18 वर्ष से कम) का पर्सनल डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनिवार्य सहमति जरूरी है।
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बच्चों के व्यवहार की ऑनलाइन ट्रैकिंग (Behavioral Monitoring) और उन पर लक्षित विज्ञापनों (Targeted Ads) पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
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बच्चे के डेटा का ऐसा कोई भी उपयोग प्रतिबंधित है जो उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाले।
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Child Online Safety कभी न पोस्ट करें बच्चों से जुड़ी ये 7 चीजें
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पहचान संबंधी दस्तावेज: जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल एडमिट कार्ड, रिपोर्ट कार्ड या किसी भी प्रकार के पहचान पत्र की फोटो।
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स्कूल और यूनिफॉर्म की डिटेल्स: ऐसी तस्वीरें जिनमें स्कूल का नाम, लोगो या यूनिफॉर्म पर लगा बैज स्पष्ट दिखाई दे रहा हो।
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लाइव लोकेशन और डेली रूटीन: “अभी अमुक पार्क में खेल रहे हैं” या “फ्लाइट पकड़ रहे हैं” जैसे लाइव लोकेशन अपडेट्स।
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घर का पता और लैंडमार्क: घर के मुख्य द्वार, घर के नंबर या घर के आसपास की सटीक जगह को दर्शाने वाली तस्वीरें।
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मेडिकल रिपोर्ट्स और हेल्थ अपडेट्स: बच्चे की बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने या मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी जानकारी।
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असहज या शर्मिंदा करने वाले पल: बच्चे के रोने, गुस्सा होने, नहाने या बिना कपड़ों वाली बचपन की तस्वीरें।
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अज्ञात लोगों के साथ तस्वीरें: ऐसे कार्यक्रमों की तस्वीरें जहां बैकग्राउंड में अनजान लोग या अनजान बच्चे मौजूद हों।
Child Online Safety क्या बच्चे की तस्वीरें कभी शेयर नहीं करनी चाहिए?
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प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करें: अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा ‘Private’ रखें। अपनी फ्रेंड लिस्ट को नियमित रूप से रिव्यू करें और केवल उन्हीं लोगों को जोड़ें जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।
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सुरक्षित कंटेंट चुनें: ऐसी तस्वीरें शेयर करें जिनमें बच्चे की कोई व्यक्तिगत डिटेल या लोकेशन न दिखे। चेहरे को थोड़ा साइड से या क्लोज-अप मोड में बिना किसी बैकग्राउंड लैंडमार्क के लिया गया हो।
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लोकेशन और जियोटैग बंद करें: फोटो अपलोड करने से पहले अपने कैमरे और सोशल मीडिया ऐप्स की ‘Location Services’ बंद कर दें।
Child Online Safety पोस्ट करने से पहले खुद से पूछें ये 5 सवाल (Parenting Checklist)
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क्या इस फोटो से मेरे बच्चे की पहचान या लोकेशन उजागर हो रही है?
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क्या इस तस्वीर से मेरे बच्चे के स्कूल या घर का पता लगाया जा सकता है?
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क्या यह फोटो 10 साल बाद मेरे बच्चे को असहज या शर्मिंदा कर सकती है?
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क्या मैं यह तस्वीर सड़क पर चलते किसी अनजान व्यक्ति को दिखाने में सहज महसूस करूंगा?
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क्या इस फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना वास्तव में आवश्यक है?

Child Online Safety यदि फोटो का गलत इस्तेमाल हो जाए तो क्या करें?
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स्क्रीनशॉट लें: डिजिटल साक्ष्य के रूप में विवादित पोस्ट, कमेंट या प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट तुरंत सुरक्षित कर लें।
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प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें: संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Facebook, Instagram, X आदि) के रिपोर्ट ऑप्शन पर जाकर कंटेंट और प्रोफाइल को ‘Child Safety Risk’ के तहत तुरंत रिपोर्ट करें।
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साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करें और घटना की जानकारी दें।
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ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
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स्थानीय साइबर सेल: अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर क्राइम सेल में जाकर लिखित शिकायत जमा करें।
Child Online Safety : डिजिटल सुरक्षा का गोल्डन रूल

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