Child Online Safety
साइबर लिटरेसी

सोशल मीडिया पर न डालें बच्चों की फोटो; जानिए ‘शेयरेंटिंग’ के खतरे, AI-डीपफेक रिस्क, पेरेंट्स के लिए सेफ्टी गाइड

Child Online Safety: स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट के इस दौर में बच्चों के विकास का हर पड़ाव सोशल मीडिया टाइमलाइन का हिस्सा बनता जा रहा है। स्कूल का पहला दिन हो, जन्मदिन का जश्न हो, खेल-कूद प्रतियोगिता में मिला मेडल हो या छुट्टी बिताने की कोई खूबसूरत तस्वीर—माता-पिता खुशी-खुशी इन लम्हों को डिजिटल दुनिया में साझा करते हैं। Child Online Safety
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले कुछ ‘लाइक्स’ और ‘कमेंट्स’ आपके मासूम बच्चे को किसी बड़े साइबर अपराध का शिकार बना सकते हैं? Child Online Safety
‘साइबर साक्षरता’ (Cyber Literacy) के तहत आज इस गंभीर विषय को विस्तार से समझना बेहद जरूरी है। जानिए सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें डालने से जुड़े जोखिम, पुलिस और जांच एजेंसियों की चेतावनियां, कानूनी पहलू और बच्चों को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक उपाय। Child Online Safety
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Child Online Safety ‘शेयरेंटिंग’ क्या है और यह क्यों चिंता का विषय है?

तकनीकी दुनिया में माता-पिता द्वारा अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि को ऑनलाइन पोस्ट करने की आदत को ‘शेयरेंटिंग’ (Sharenting) कहा जाता है। यह शब्द ‘शेयरिंग’ (Sharing) और ‘पेरेंटिंग’ (Parenting) से मिलकर बना है। वर्ष 2012 में ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने पहली बार इस शब्द का प्रयोग किया था।
McAfee द्वारा किए गए सर्वेक्षण ‘द एज ऑफ कंसेंट’ में भारत के संदर्भ में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे:
  • 98% अभिभावक अपने बच्चों की ऐसी तस्वीरें इंटरनेट पर पोस्ट करते हैं, जो भविष्य में बड़े होने पर बच्चों के लिए शर्मिंदगी या असहजता का कारण बन सकती हैं।
  • 40% से अधिक माता-पिता रोजाना कम से कम एक बार अपने बच्चे की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हैं।
  • 79% अभिभावक ‘पब्लिक’ अकाउंट्स पर तस्वीरें शेयर करते हैं, जहां प्राइवेसी सुरक्षा लगभग शून्य होती है और कोई भी अनजान व्यक्ति उन तस्वीरों तक पहुंच सकता है।

Child Online Safety ऑनलाइन तस्वीरें पोस्ट करने के 6 सबसे बड़े साइबर जोखिम

एक बार जब आप कोई तस्वीर इंटरनेट पर अपलोड कर देते हैं, तो उस पर से आपका नियंत्रण समाप्त हो जाता है। डिजिटल स्पेस में बच्चों की फोटो शेयर करने से निम्नलिखित गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं:

1. AI और डीपफेक (Deepfake) का बढ़ता खतरा

आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स इतने उन्नत हो चुके हैं कि किसी बच्चे की सामान्य तस्वीर का इस्तेमाल करके फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट (AI Morphing) तैयार किया जा सकता है। साइबर अपराधी इन डीपफेक तस्वीरों का उपयोग ब्लैकमेलिंग और साइबर क्राइम में कर रहे हैं।

2. जियोटैग (Geotag) और लोकेशन ट्रैकिंग

स्मार्टफोन से खींची गई तस्वीरों में अक्सर ‘जियोटैग’ या मेटाडेटा (Exif Data) छिपा होता है। यदि आपके फोन की लोकेशन सेटिंग ऑन है, तो फोटो अपलोड होते ही अपराधी यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि वह फोटो किस स्थान, घर या पार्क में ली गई थी।

3. डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) का स्थायी होना

इंटरनेट पर डाला गया डेटा कभी भी पूरी तरह मिटता नहीं है। यदि आप पोस्ट डिलीट भी कर दें, तब भी कोई व्यक्ति उसका स्क्रीनशॉट ले सकता है या उसे डाउनलोड करके सेव कर सकता है। यह ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ बच्चे के वयस्क होने पर उसकी छवि और प्राइवेसी को प्रभावित कर सकता है।

4. पहचान की चोरी (Identity Theft)

बच्चों के रिपोर्ट कार्ड, एडमिट कार्ड, या प्रमाण पत्रों की तस्वीरें पोस्ट करने से उनका पूरा नाम, जन्मतिथि, स्कूल का नाम, रोल नंबर और माता-पिता का नाम सार्वजनिक हो जाता है। साइबर ठग इस डेटा का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी और नकली दस्तावेज बनाने में करते हैं।

5. साइबर बुलिंग (Cyberbullying)

बच्चों की बचपन की ऐसी तस्वीरें या वीडियो, जिनमें वे रो रहे हों, सजा पा रहे हों या असहज स्थिति में हों, आगे चलकर उनके सहपाठियों या ऑनलाइन यूज़र्स द्वारा उनके मजाक उड़ाने और बुलिंग का जरिया बन सकती हैं।

6. अपराधियों और अपहरणकर्ताओं की नजर

सोशल मीडिया पर बच्चे की रोजाना की दिनचर्या (जैसे स्कूल जाने का समय, ट्यूशन क्लास, या शाम को खेलने का पार्क) पोस्ट करने से अपराधी बच्चे का डेली रूटीन ट्रैक कर सकते हैं, जिससे अपहरण या अन्य गंभीर अपराधों का जोखिम बढ़ जाता है।
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Child Online Safety क्या स्कूलों का पोस्ट करना भी खतरनाक है?

अक्सर स्कूल अपने प्रमोशन और गतिविधियों को दिखाने के लिए बच्चों की तस्वीरें और वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर साझा करते हैं।
  • जोखिम: चूंकि स्कूलों के सोशल मीडिया पेजेस ‘पब्लिक’ होते हैं, इसलिए कोई भी असमाजिक तत्व वहां से बच्चों की तस्वीरें, यूनिफॉर्म का बैज, स्कूल की टाइमिंग और लोकेशन निकाल सकता है।
  • स्कूलों के लिए सावधानियां:
    1. स्कूलों को अभिभावकों की लिखित सहमति (Consent Form) के बिना बच्चों की तस्वीरें पोस्ट नहीं करनी चाहिए।
    2. पोस्ट में कभी भी बच्चे का पूरा नाम या रोल नंबर उजागर न करें।
    3. सामूहिक तस्वीरों में चेहरे को धुंधला (Blur) करने की नीति अपनाएं।
    4. एक स्पष्ट और सख्त सोशल मीडिया प्राइवेसी पॉलिसी लागू करें।

Child Online Safety पुलिस की एडवाइजरी और कानूनी सुरक्षा नियम

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकारी संस्थाएं लगातार सख्त कदम उठा रही हैं:
  • पुलिस एवं I4C एडवाइजरी: ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) और असम पुलिस सहित कई राज्य पुलिस बलों ने अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को बच्चों की संवेदनशील जानकारी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर न शेयर करने की स्पष्ट चेतावनी जारी की है।
  • डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act, 2023): भारत सरकार के नए डेटा प्राइवेसी कानून के तहत बच्चों के डिजिटल डेटा को विशेष सुरक्षा दी गई है:
    • किसी भी बच्चे (18 वर्ष से कम) का पर्सनल डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनिवार्य सहमति जरूरी है।
    • बच्चों के व्यवहार की ऑनलाइन ट्रैकिंग (Behavioral Monitoring) और उन पर लक्षित विज्ञापनों (Targeted Ads) पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
    • बच्चे के डेटा का ऐसा कोई भी उपयोग प्रतिबंधित है जो उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाले।
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Child Online Safety कभी न पोस्ट करें बच्चों से जुड़ी ये 7 चीजें

बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित जानकारियों को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखें:
  1. पहचान संबंधी दस्तावेज: जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल एडमिट कार्ड, रिपोर्ट कार्ड या किसी भी प्रकार के पहचान पत्र की फोटो।
  2. स्कूल और यूनिफॉर्म की डिटेल्स: ऐसी तस्वीरें जिनमें स्कूल का नाम, लोगो या यूनिफॉर्म पर लगा बैज स्पष्ट दिखाई दे रहा हो।
  3. लाइव लोकेशन और डेली रूटीन: “अभी अमुक पार्क में खेल रहे हैं” या “फ्लाइट पकड़ रहे हैं” जैसे लाइव लोकेशन अपडेट्स।
  4. घर का पता और लैंडमार्क: घर के मुख्य द्वार, घर के नंबर या घर के आसपास की सटीक जगह को दर्शाने वाली तस्वीरें।
  5. मेडिकल रिपोर्ट्स और हेल्थ अपडेट्स: बच्चे की बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने या मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी जानकारी।
  6. असहज या शर्मिंदा करने वाले पल: बच्चे के रोने, गुस्सा होने, नहाने या बिना कपड़ों वाली बचपन की तस्वीरें।
  7. अज्ञात लोगों के साथ तस्वीरें: ऐसे कार्यक्रमों की तस्वीरें जहां बैकग्राउंड में अनजान लोग या अनजान बच्चे मौजूद हों।

Child Online Safety क्या बच्चे की तस्वीरें कभी शेयर नहीं करनी चाहिए?

इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप खुशी के पल शेयर ही न करें। सुरक्षा के साथ शेयर करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
  • प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करें: अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा ‘Private’ रखें। अपनी फ्रेंड लिस्ट को नियमित रूप से रिव्यू करें और केवल उन्हीं लोगों को जोड़ें जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।
  • सुरक्षित कंटेंट चुनें: ऐसी तस्वीरें शेयर करें जिनमें बच्चे की कोई व्यक्तिगत डिटेल या लोकेशन न दिखे। चेहरे को थोड़ा साइड से या क्लोज-अप मोड में बिना किसी बैकग्राउंड लैंडमार्क के लिया गया हो।
  • लोकेशन और जियोटैग बंद करें: फोटो अपलोड करने से पहले अपने कैमरे और सोशल मीडिया ऐप्स की ‘Location Services’ बंद कर दें।

Child Online Safety पोस्ट करने से पहले खुद से पूछें ये 5 सवाल (Parenting Checklist)

कोई भी तस्वीर या वीडियो अपलोड करने का बटन दबाने से पहले खुद से ये पांच सवाल जरूर पूछें:
  1. क्या इस फोटो से मेरे बच्चे की पहचान या लोकेशन उजागर हो रही है?
  2. क्या इस तस्वीर से मेरे बच्चे के स्कूल या घर का पता लगाया जा सकता है?
  3. क्या यह फोटो 10 साल बाद मेरे बच्चे को असहज या शर्मिंदा कर सकती है?
  4. क्या मैं यह तस्वीर सड़क पर चलते किसी अनजान व्यक्ति को दिखाने में सहज महसूस करूंगा?
  5. क्या इस फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना वास्तव में आवश्यक है?
यदि इनमें से किसी भी सवाल का जवाब आपको शंका में डालता है, तो उस फोटो को पोस्ट न करना ही समझदारी है।
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Child Online Safety यदि फोटो का गलत इस्तेमाल हो जाए तो क्या करें?

यदि आपको संदेह हो या पता चले कि आपके बच्चे की तस्वीर का गलत इस्तेमाल हुआ है या किसी अनजान व्यक्ति द्वारा उसका पीछा/निगरानी की जा रही है, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
  1. स्क्रीनशॉट लें: डिजिटल साक्ष्य के रूप में विवादित पोस्ट, कमेंट या प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट तुरंत सुरक्षित कर लें।
  2. प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें: संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Facebook, Instagram, X आदि) के रिपोर्ट ऑप्शन पर जाकर कंटेंट और प्रोफाइल को ‘Child Safety Risk’ के तहत तुरंत रिपोर्ट करें।
  3. साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करें और घटना की जानकारी दें।
  4. ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
  5. स्थानीय साइबर सेल: अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर क्राइम सेल में जाकर लिखित शिकायत जमा करें।

Child Online Safety : डिजिटल सुरक्षा का गोल्डन रूल

डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा का सबसे बड़ा नियम यही है: “कुछ भी पोस्ट करने से पहले दो बार सोचें।”
सोशल मीडिया के कुछ घंटों के ‘लाइक’ और ‘कमेंट्स’ कभी भी आपके बच्चे की सुरक्षा और प्राइवेसी से बढ़कर नहीं हो सकते। बच्चों को जिस तरह हम वास्तविक दुनिया में ‘गुड टच और बैड टच’ के बारे में सिखाते हैं, उसी तरह उन्हें और खुद को ‘सेफ और अनसेफ डिजिटल प्राइवेसी’ के प्रति जागरूक बनाना समय की मांग है। एक सतर्क अभिभावक ही बच्चे का सबसे मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच बन सकता है। Child Online Safety
Mycity18
MyCity18 के ऑथर और संपादक महेश कांत शिवा हैं। महेश कांत शिवा अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे बड़े मीडिया घरानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पत्रकारिता में करीब 25 साल का अनुभव है। 10 साल प्रिंट मीडिया और 15 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। वर्तमान में अपना लव ब्लॉग चलाने के साथ साथ मॉयसिटी18 डॉट कॉम का संचालन कर रहे हैं।
https://mycity18.com

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