Chandigarh Reema Chauhan: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो गरीबी और अभाव कभी भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकते। चंडीगढ़ के सेक्टर-22 की गलियों से निकलकर एक ऐसी ही कहानी सामने आई है, जो न केवल शहर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
एक साधारण परिवार की बेटी, रीमा चौहान, अब भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। रीमा को ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की ओर से हैदराबाद में आयोजित होने वाली AIFF–FIFA टैलेंट एकेडमी के ट्रायल के लिए आमंत्रित किया गया है।
Chandigarh Reema Chauhan देशभर के 30 खिलाड़ियों में मिली जगह, प्रोफेशनल बनने की ओर बढ़ते कदम
रीमा चौहान की यह उपलब्धि इसलिए बड़ी है क्योंकि इस विशेष ट्रायल के लिए पूरे भारत से केवल 30 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन किया गया है। यह ट्रायल 21 से 23 अप्रैल को हैदराबाद में आयोजित होने जा रहे हैं।
यदि रीमा इस ट्रायल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में सफल रहती हैं, तो एकेडमी की ओर से उन्हें एक पेशेवर (Professional) फुटबॉल खिलाड़ी बनने के लिए हर संभव मदद, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। चंडीगढ़ खेल विभाग भी रीमा की इस उपलब्धि को लेकर बेहद उत्साहित है और इसे शहर के खेल जगत के लिए एक मील का पत्थर मान रहा है।

Chandigarh Reema Chauhan तीसरी कक्षा से शुरू हुआ फुटबॉल का जुनून
रीमा चौहान वर्तमान में सेक्टर-22 के सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हैं। उनके फुटबॉल के सफर की शुरुआत तब हुई जब वह तीसरी कक्षा में थीं। स्कूल के मैदान पर दूसरे बच्चों को फुटबॉल के पीछे भागते देख रीमा के मन में भी इस खेल के प्रति जिज्ञासा जागी।
उनकी सीनियर खिलाड़ी एंथनी मेहतो रीमा के लिए पहली प्रेरणा बनीं। रीमा बताती हैं, “मुझे फुटबॉल से पहला प्यार स्कूल के मैदान पर ही हुआ। धीरे-धीरे यह खेल मेरी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गया कि अब मौसम चाहे कैसा भी हो—कड़कती धूप हो या बारिश—मैं एक भी दिन अपना प्रैक्टिस सेशन नहीं छोड़ती।”

Chandigarh Reema Chauhan पिता लगाते हैं रेहड़ी, लेकिन सपनों पर नहीं लगने दी पाबंदी
रीमा एक बहुत ही साधारण मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके घर की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है। रीमा के पिता सेक्टर-22 की शास्त्री मार्केट में रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
वह घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। रीमा अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। दिलचस्प बात यह है कि रीमा के तीनों भाई-बहन भी फुटबॉल खेलते हैं। गरीबी के बावजूद रीमा के माता-पिता और उनकी दादी ने कभी उनके सपनों के बीच दीवार नहीं खड़ी की, बल्कि उन्हें हर कदम पर मोटिवेट किया।
Chandigarh Reema Chauhan कोच भूपिंदर सिंह पिंका: जौहरी जिसने पहचाना हीरा
रीमा की इस सफलता के पीछे उनके कोच भूपिंदर सिंह पिंका की कड़ी मेहनत है। कोच भूपिंदर रीमा के स्कूल में ही बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देते हैं। उन्होंने शुरुआती दिनों में ही रीमा के भीतर छिपी प्रतिभा, उसकी तकनीक और मैदान पर उसकी एकाग्रता को पहचान लिया था।
उन्होंने रीमा को नियमित रूप से प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी और न केवल उसकी फिटनेस, बल्कि मानसिक मजबूती को बढ़ाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई। विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक रीमा का पहुंचना और अब FIFA एकेडमी के दरवाजे तक दस्तक देना, कोच पिंका के मार्गदर्शन का ही परिणाम है।

Chandigarh Reema Chauhan दुनिया के महान डिफेंडर्स को मानती हैं अपना आदर्श
रीमा चौहान एक शानदार डिफेंडर हैं और उनके खेल में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों की झलक मिलती है। वह तीन बड़े नामों को अपना आदर्श मानती हैं:
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वर्जिल वैनडाइक: रीमा उनकी मजबूत डिफेंस और टीम नेतृत्व क्षमता की कायल हैं।
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पाओलो मालदिनी: रीमा ने मालदिनी से खेल में शांति और समझदारी के साथ बचाव करना सीखा है।
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सर्जियो रामोस: रामोस का आक्रामक अंदाज, जुनून और टीम के लिए लड़ने का जज्बा रीमा को हमेशा प्रेरित करता है।
Chandigarh Reema Chauhan क्या है FIFA टैलेंट एकेडमी?
फीफा टैलेंट एकेडमी, फीफा की टैलेंट डेवलपमेंट स्कीम (TDS) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उभरते हुए टैलेंट को खोजकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग देना है। भारत में यह AIFF के साथ मिलकर काम करती है। यहाँ चयनित खिलाड़ियों को:
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विश्वस्तरीय कोच और मॉडर्न खेल सुविधाएं मिलती हैं।
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स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी और पोषण संबंधी मार्गदर्शन दिया जाता है।
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खिलाड़ियों की पढ़ाई, सुरक्षित आवास और पौष्टिक भोजन की जिम्मेदारी भी एकेडमी ही उठाती है।
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वीडियो विश्लेषण के जरिए खेल की बारीकियों को सिखाया जाता है।
Chandigarh Reema Chauhan: भारतीय फुटबॉल की ‘फैक्ट्री’
चंडीगढ़ ने देश को कई महान फुटबॉलर दिए हैं, जो रीमा के लिए प्रेरणा का काम करते हैं:
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गुरप्रीत सिंह संधू: भारतीय टीम के कप्तान और गोलकीपर, जो यूरोप की शीर्ष लीग में खेलने वाले पहले भारतीय हैं।
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संदेश झिंगन: भारतीय डिफेंस की दीवार, जिन्होंने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग चंडीगढ़ से ही ली।
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अमरजीत सिंह कियाम: 2017 FIFA अंडर-17 विश्व कप में भारतीय टीम के कप्तान।
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जेकसन सिंह: फीफा विश्व कप (अंडर-17) में भारत के लिए एकमात्र गोल करने वाले खिलाड़ी।

Chandigarh Reema Chauhan मिनर्वा एकेडमी और लिवरपूल एफसी पर ऐतिहासिक जीत
चंडीगढ़ और मोहाली क्षेत्र में स्थित मिनर्वा एकेडमी को भारतीय फुटबॉल की नर्सरी कहा जाता है। अप्रैल 2026 में ही इस एकेडमी की अंडर-15 टीम ने स्पेन में आयोजित MIC कप में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित क्लब लिवरपूल एफसी को 6-0 से हराकर पूरे विश्व में तहलका मचा दिया था। इसी एकेडमी से संधू और झिंगन जैसे 100 से अधिक खिलाड़ी भारतीय टीम तक पहुंचे हैं।
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Chandigarh Reema Chauhan निष्कर्ष: पूरे देश की निगाहें रीमा पर
रीमा चौहान का सपना न केवल एक प्रोफेशनल खिलाड़ी बनना है, बल्कि नीली जर्सी पहनकर पूरी दुनिया में तिरंगा लहराना है। 21 अप्रैल से होने वाले ट्रायल्स पर न केवल रीमा के परिवार, बल्कि चंडीगढ़ के खेल प्रेमियों की भी नजरें टिकी हैं। रीमा की सफलता यह संदेश देती है कि मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ी के लिए गरीबी महज एक शब्द है, लक्ष्य नहीं।
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